जुलाई के महीने की सुरीली शुरुआत 2008 बैच के ias अधिकारीयों ने बड़े ही धूम-धाम से की. नीरज और ललिता की जोड़ी ने सुरों का जो समां बांधा वो हर किसी का मन मोह गया. उनके गाने सुनते हुए मन रोमांस की वादियों में खोया सा बच्चा बना हुआ था. पूनम ने भी दो अच्छे गाने गए. उदित ने मानों सारे लोगों की व्यथा को "Give me some sunshine" गाने में बड़ी ही मोहक अदा से उकेरा. वाकई में हम लोग भी सारी बंदिशों से मुक्त हो जीवन को अपनी शर्तों पर जीना चाहते हैं, मस्ती से जीना चाहते हैं. सीनिअर लोगों ने भी जलवे दिखाते हुए कुछ काफी अच्छे गाने पेश किये. मैडम द्वारा प्रस्तुत किया गया बुन्देलखंडी गाना- "मैं तो चंदा जैसे नार, पिया तुम क्यूँ लाये सौतनियाँ?" पर लोगों खासकर नए-नए शादी-शुदा लोगों ने जम कर तालियाँ पीटी.
किरण गोपाल ने अमीर खुसरो की प्रसिद्ध fusion ग़ज़ल जिसमे फारसी, उर्दू और ब्रजभाषा का मिश्रित प्रयोग है, जम कर वाह-वाही बटोरी. चन्द्रकला की बेटी कीर्ति ने सुनिधि के गाने को काफी आत्मविश्वास और सुरीली आवाज में गाकर लोगों का मन मोह लिया. नन्हे-मुन्नों ने अपने गायन और नृत्य का जलवा बिखेरा. एम्फीथियेटर में बैठे साथी आपस में कनफुसकियाँ और दबी-छुपी खिलखिलाहटों का सिलसिला भी चलाते रहे. समारोह का अंत विवेक और नीरज ने "आने वाला पल जाने वाला है" गाने से किया. पूरे कार्यक्रम में अपने शानदार मंच सञ्चालन और सटीक शेरों-शायरी से पवन भाई ने जम कर तालियाँ बटोरी और कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए. फैकैल्टी के ढेर सारे लोगों की उपस्तिथि भी हम लोगों के लिए काफी प्रेरणास्पद थी.
वाकई, कई दिनों की बोरिंग लाइफ के बाद आज की मस्ती ने इस जुलाई का मस्त आगाज किया है, बस दोस्तों के साथ के इस पल को इसी तरह हमेशा हम लोग एन्जॉय करते रहे, यही दुआ है. आमीन!
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